भरत तिवारी प्रकरण : बिहार के संस्कार या नंगा नाच
"भरत तिवारी प्रकरण: बिहार के संस्कार या सियासत का नंगा नाच?"*
भरत तिवारी... भरत तिवारी... भरत तिवारी.....
आज फेसबुक खोलो, व्हाट्सएप देखो या न्यूज चैनल लगाओ - हर जगह बस एक ही नाम गूंज रहा है। कोई भरत तिवारी को देशभक्त का तमगा दे रहा है, तो कोई बिहार के मुख्यमंत्री की माँ-बहन को गालियों से सराबोर कर रहा है।
मैं पूछता हूँ - क्या यही हमारा संस्कार है? क्या यही प्रजातंत्र की परिभाषा है?
जिस बिहार की धरती ने बुद्ध को जन्म दिया, जिस मिट्टी से चाणक्य की नीति और चंद्रगुप्त का शौर्य निकला, आज उसी बिहार को गाली-गलौज का अखाड़ा बना दिया गया है।
माननीय शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी जी खुद को चाणक्य का वंशज बताते हैं, तो *माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी* को चंद्रगुप्त मौर्य का वंशज कहा जाता है। अगर चाणक्य और चंद्रगुप्त फिर से मिलकर काम करें तो पाटलिपुत्र फिर से बिहार का मुकुट बन सकता है ,,, पर आज हम क्या कर रहे हैं ?
जून-जुलाई की चिलचिलाती धूप से बिहार उतना परेशान नहीं हुआ, जितना इस "भरत तिवारी प्रकरण" ने बिहार को तबाही के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।
सबसे दुखद पहलू ये है: कि कुछेक मीडिया और बुद्धिजीवियों को छोड़ दें तो अधिकतर लोग नंगा नाच कर रहे हैं। दुख इस बात का है कि सत्ता पक्ष के कुछ कद्दावर नेता भी इस जंग में अपने आपको महारथी समझ खुद को पेश कर रहे हैं।
दरअसल ये जंग भरत तिवारी को न्याय दिलाने की नहीं है। ये "कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना" वाली राजनीति ज्यादा लग रही है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी के अलावा भी देश में कई मुख्यमंत्री हैं,,, पर निशाने पर सिर्फ बिहार हीं क्यों? क्योंकि बिहार को बदनाम करना सबसे आसान है।
बिहार को मवाली का गाली नहीं, विकास की प्याली चाहिए ।
बिहार को जंग नहीं, सुशासन के साथ लोगों का संग चाहिए ।
बिहार को जाति धर्म का रोग नहीं , नए नए उद्योग चाहिए ।
नेताओं से हाथ जोड़कर विनती है - आंदोलन या प्रदर्शन आप अवश्य कीजिए क्योंकि किसी भी प्रजातांत्रिक देश में यह उसका हक होता है परन्तु मुद्दों के आधार पर ,,,। मुख्यमंत्री जैसे वरिष्ठ एवं सम्मानित पद पर आसीन जनसेवक के माँ-बहन को गालियों से सराबोर करना,,या करवाना,,, हमारे संस्कार से परे है । बिहार की जनता अब समझदार हो गई है। वो जानती है कि कौन उसके हित के लिए लड़ रहा है और कौन सिर्फ कुर्सी के लिए ,,,,धन्यवाद
जय बिहार, जय भारत, जय लोकतंत्र ।
जन्मभूमि बिहार एवं कर्मभूमि महाराष्ट्र का
एक व्यथित बिहारी
राजाराम सिंह
दिनांक: 01/07/2026
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