अतिथि सत्कार एवं आभार
- rajaramdsingh
- Apr 13, 2022
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करके स्वीकृत आमंत्रण ,बढ़ाया प्रियवर हमारा मान ,
व्यक्त करके कृतज्ञता,करते हैं हम आपका सम्मान ।
डरता हूँ कुछ भूल न हो जाए , इसलिए देता हूँ फुल ,
करना क्षमा अपराध मेरे , इसमें छिपा है मेरा प्राण ।।
दूरदर्शी आप हैं , दूरदर्शी है आपकी दृष्टि ,
जग की भलाई में ही ,छिपे है सुन्दर सृष्टि ।
सौभाग्य एक योगी को, मिला सुन्दर सहयोगी ,
बेरा पार करे हम सब को , आपकी दूरदृष्टि ।।
आपके आ जाने से , गुमनाम को मिलता नाम ,
मिले आशीष आपका , तो मिल जाती पहचान ।
मुकद्दर भी भला , क्यों न रंग बदलेगा ,
जब सुदामा को मिला हो आप जैसा घनश्याम ।।
हार को जीत की, एक अद्भुद दुआ मिल गई ,
गर्मी के मौसम को , मानो ठंढी हवा मिल गई ।
आपको हमारे बीच, पधारने से हे प्रियवर ,
दर्द को एक मनभावन, मानो दवा मिल गई ।।
मानो मरुस्थल में जैसे , रंगीन गुल खिल गए ,
समुद्र में भटके को, मानो उनका तट मिल गए ।
आपका सानिद्ध्य हमें , ऐसा लगा श्रीमान ,
जैसे शबरी को , प्रभु श्रीराम मिल गए ।।
आप तो सिर्फ आप हीं है ,चर्चा है चहु ओर ,
यश कीर्ति भी है अनुपम ,जिसका ओर न छोड़ ।
कथन वचन से प्रीतिकर,सचमुच सुन्दर स्वभाव ,
क्या करूँ बखान, नहीं है कोई आपका तोड़ ।।
सफल हुआ है कार्यक्रम ,सफल हुआ उद्देश्य ,
आपके सान्निध्य से ,बचा न कोई सपना शेष ।
करते मन से चन्दन वंदन और तेरा अभिनन्दन ,
आभारी सदैव रहेंगे , देते आपको वचन विशेष ।।
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