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अर्थहीन

  • rajaramdsingh
  • Mar 27, 2022
  • 1 min read

जब हो विपरीत विचार ,घटना घटे दिनरात विभिन्न ।

पवित्र प्यार के रिश्ते भी , हो जाते तब अर्थहीन ।।


लगते जल बिन पौधे सूखने , जड़ हो जाते हैं जब हीन ।

भरपूर बारिश का आना भी, तब हो जाते हैं अर्थहीन।।


हो भले हीं खून के रिश्ते, तेरे दुःख में खुद में लीन ।

सुख के ऐसे सम्बन्धी भी ,तब हो जाते हैं अर्थहीन ।।


मन दुखी हो बीमारियों से ,गिन रहा बिस्तर पर दिन |

लता दीदी के सुरीले संगीत भी, हो जाते तब अर्थहीन ।।


नकाबपोशों के चहरे से , परदा जब जाता है छीन।

अनगिनत सफाई देना भी , तब हो जाते अर्थहीन।।


हो विचार का रसधार जब , बंजर बने उपजाऊ जमीन ।

रहे एकता शिव परिवार सी , तब शत्रु होते अर्थहीन ।।


कहे राजाराम गंदे विचार से,बदल जाते हैं सारे सीन ,

अच्छे खासे विचारवान भी , तब हो जाते हैं अर्थहीन ।।

 
 
 

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