सिल्वर जुबली
- rajaramdsingh
- Mar 27, 2022
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Updated: Apr 13, 2022
आया वर्षगांठ पच्चीसवां , हमारे पावन परिणय का ।
आज़ाद पंछी सा खुले नभ में , विचरण पर अंकुश भरने का ।।
लगता था स्मार्ट कभी मैं , अब तोंद निकल आया है।
हर हफ्ते पिक्चर जाता था ,अब यादें भर रह पाया है।।
पहले सेविंग्स छः अंकों से , नहीं कभी था नीचे जाता।
अब अगर हो चार अंक भी , तो ज़रूरी सामान ले आता।।
थे अपने सिर शादी से पहले , काले सघन घुंघराले बाल।
सालगिरह पच्चीसवीं आते आते , उड़े भूरे सफ़ेद कुछ लाल।।
वह दिन भी है याद हमने जब , दर्जनों रसगुल्ला खा जाते थे ।
पानी के बदले ठंढे मौसम में , कोल्ड ड्रिंक हीं गटक जाते थे।।
नाश्ते में कभी बड़े समोसे , या दर्जनों आम खा जाते थे ।
तरुआ तीमन बअरी कचरी, या चटपटे चीज अपनाते थे ।।
आज मिठाई को दूर से हीं , हथजोड़ नमन करना पड़ता है।
गरम पकौड़े भले बन रहा , मन मसोर रहना पड़ता है।।
नंबर ऊंचा लगा चश्मे का , खाने के दांत गए कई टूट ।
बी पी शुगर कोलोस्ट्रोल बढ़ा , छूट गया पहनना शूट।।
भगवान की असीम कृपा से, हुआ प्यारा प्रिंस रविराज।
प्रखर प्रतिभा और नेक कर्म से , करेगा बंद सबकी आवाज़।।
श्रीकृपा से सिल्वर जुबली , सिंह गीता राजाराम मना रहे ।
श्रेष्ठ जनों का आशीष पाने ,हम अपना शीश झुका रहे ।।
१३ / जून / २०१८
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