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कब खुलेगा लॉक डाउन

  • rajaramdsingh
  • Mar 22, 2022
  • 2 min read

बहुत सहे है आहें भरे है , खत्म हुए सबके अरमान । अधीर हो रहे तोड़ सपने , लग रहे जैसे बेजान ।।

राशन बांट एहसान करे कोई , खींच फोटो उड़ाते मज़ाक । सच कहता गरीबों की इज्जत , मानो जैसे हो गई हो खाक ।।

दो दिन के राशन क्या दे दी , मानो बन बैठे भाग्य विधाता । घंटों खडे लाइन में रखते , कहते खुद को अन्नपूर्णामाता ।।

कोई मीलों पैदल चलता , सायकल पर है कोई सवार । दुर्घटना को दे खुला निमंत्रण , साथ चल दिए पूरा परिवार ।।

न ट्रेन न बस ना कोई जहाज , जहां भरता सपनों का उड़ान । जन्मभूमि को नमन करने को , श्रमिक सपूत दिखते परेशान ।।

कोई ट्रेन से कटकर मरता , कोई सड़क पर देता जान । बिना चप्पल तपती सड़क , बन चुकी है जैसे श्मशान ।।

कोई है दो दिन का भूखा , उठा गठरी सिर जा रहा । कोई भिखारियों के जैसे , रोटी को हाथ बढ़ा रहा ।।

ये हैं वही मेहनती मजदूर , जो बड़ी बड़ी इमारतें बनाते । रोटी तक नहीं नसीब इनको , न कोई दिखते हाथ बढ़ाते ।।

इनकी जिंदगी मज़ाक बन, एक छोटी बैग में सिमटी । एक बूंद पानी पीने को , दूधमुंही बच्ची भी तड़पती ।।

संत समाज मारे गए जान से , चली गुंडों की तीर कमान । खड़ी पुलिस बेसहारा बनकर , ना बचा सकी वे उनकी जान ।।

ट्रक में भरकर मजदूरों को , ले जा रही उसे पैतृक गांव । नहीं पूछता पुलिस परमिशन , नेता चल रहे अपनी दाव ।।

सरकार स्थिति सुधारने को , कर रही अनवरत प्रयास । बीस लाख करोड़ पैकेज से , सुधरेगी स्थिति है ऐसी आस ।।

लाखों लोग दुनियां में संक्रमित , भारत में भी हैं एक लाख । इंतज़ार लॉक डाउन खुलने का , भगवान बचाबे इनकी साख ।।

कहे राजाराम कब खुलेगा , लॉक डाउन भारत का अपना । विश्व युद्ध की घोषणा नहीं हो , अन्यथा टूट जाएगा सपना ।।

 
 
 

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