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कर्ज़ माफ करो

  • rajaramdsingh
  • Mar 20, 2022
  • 1 min read

तेज हवा के झोंको ने , चित्रा के चकोरों ने । खूब कहर बरपाया , बारिश के थपेड़ों ने ।।


समय आ चुका नाश का , दुनियां के विनाश का । बांध धैर्य का टूट चुका है , किसानों के विश्वास का ।।


कृषक बेचारा क्या करेगा , इनके दर्द को कौन सुनेगा । है नहीं कोई फसल बीमा , परिवार इनका कैसे चलेगा ।।


हे भारत के भाग्यविधाता , कर्मवीर किसानों के भ्राता । कर्ज़ माफ करके तू इनके । बचा लो भैया हैं अन्नदाता ।।

 
 
 

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