कांवर उठाएंगे ......
- rajaramdsingh
- Mar 26, 2022
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Updated: Mar 28, 2022
कांवर उठाएंगे , घुंघरू लगाएंगे ,
डब्बे में गंगाजल भर, पूजा कराएंगे .................
जाना है बाबा दरबार ले के काँधे पे कांवर २
श्रावण के महीने में , सुल्तानगंज हम जाएंगे ,
बन भिखारी काँधे पे कांवर को उठाएंगे
बोल बम का नारा , बाबा एक सहारा
नैया हो मजधार में , बाबा करे किनारा
अनुसुइया पर्वत हो या , दुष्टों की हो छाया
बोलबम के नारा से हीं , मिटते हैं दुःख सारा
महिमा बड़ा है महान भरते सबका ये गागर.......
जाना है बाबा दरबार ले के काँधे पे कांवर
पतिव्रता एक नारी थी , पार्वती की प्यारी थी
कुष्टरोग से पीड़ित पति संग, फिरती मारी मारी थी
श्रावण के महीने में वो , कांवर लेकर चल पड़ी
पाँव में जब छाला पड़ी तो , जीते जी वह मर गई
देवघर वो आई थी , जल को चढ़ाई थी
दर्शन बाबा का करके , मुरादें पाई थी
पति को दे वरदान , भरे थे उसका भी गागर ......
जाना है बाबा दरबार ले के काँधे पे कांवर
हम अति अज्ञानी हैं, जीवन मेरी कहानी है
भूल गया था जग में आकर , इसकी हीं हैरानी है
कर दो बेरा पार , महिमा तेरी अपार
हाथ जोड़ विनती करूँ मैं , करो मेरा उद्धार
बम बनकर आऊंगा , नारा लगाऊंगा
चरणों में शीश झुकाकर , आशीष पाउँगा
करो बाबा ऐतवार , भरो तुम मेरा भी गागर .......
जाना है बाबा दरबार ले के काँधे पे कांवर
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