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काली गीत

  • rajaramdsingh
  • Mar 21, 2022
  • 1 min read

Updated: Sep 21, 2023

नरमुंडों की माल धारिनी , भक्तों की हितकारिणी है । 2 काली रूप हे खप्परवाली , तू भवसागर कीतारिणी है ।। 2


तूने कितने असुरों को

मुंह में ले कर चबा डाली । उसके तीखे वाणों को भी , पल भर में निपटा डाली ।। दुष्टों क़ा भय बढ़ाने वाली , दुष्ट दलन संहारिनी है । काली रूप हे खप्परवाली भवसागर की तारिणी है।।


जब रणभूमि में विचरती हो , तब हाथी घोड़ा कुचलती हो

शुम्भ निशुम्भ या कोई असुर संहार उसका तू करती हो ।। भक्तों की हो चामुंडा , तू दुष्टों की चण्डालिनी है । काली रूप हे खप्परवाली , भवसागर की तारिणी है ।।


ना पूजा हमें करने आता , ना पाठ ही मैं कर पाता । नहीं हाथ में पूजा की थाली , न छप्पन भोग लगा पाता ।। हमें शरण में ले लो माँ

तु शरणागत सदज्ञानी है

काली रूप हे खप्परवाली , भवसागर की तारिणी है ।।


हे नरमुंडों की माल धारिनी , भक्तों की हितकारिणी है। काली रूप हे खप्परवाली , भवसागर की तारिणी है ।। ******************************

 
 
 

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