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कोरोना काल औेर ससुराल*

  • rajaramdsingh
  • Mar 21, 2022
  • 1 min read

Updated: Mar 31, 2022

जब पहुंच कोरोना काल में ससुराल !

बहुत ही अजीब सा था वहां का हाल !!


घर की घंटी बजाते ही सास दौड़ी आई !

देख जमाई को आज, मजबूरी मे मुसकाई !!


बोली थोड़ी देर गेट पर आप ठहर जाओ !

वाश वेशन पर सैनिटाइजर से हाथ धो आओ !!


पढे लिखे हो चेहरे पर मास्क नहीं लगाया ?

घर पर ही रहना था किसी ने नहीं समझाया ??


खैर आ ही गए हो तो दरवाजे पर जूते दो उतार !

पैर धोकर आ जाओ जबतक चाय करते है तैयार !!


मन मे उठा बहुत क्रोध पर कुछ कह नहीं पाया !

लगा जैसे जमाई नही, राक्षस ससुराल आया !!


इज्जत तो सारी आज कोरोना ने हर ली !

बाकी की कसर सासू माँ ने पूरी कर ली !!


बेआबरू हो कदम साली की ओर बढाया !

वहां से भी नकारात्मक सा उत्तर आया !!


बोली सामाजिक दूरी को समझ नहीं पाये ?

इतने पास हमारे क्यूँ जीजाजी चले आऐ ??


दूर से ही करती हूँ जीजा आज आपको नमस्ते !

छोटे साले ने भी दूर से हाथ हिलाया, हंसते हंसते !!


फिर ससुर जी की मधुर आवाज दी सुनाई !

कवारंटाइन करना रे, बाहर से आये हैं जमाई !!


चाय हाथ में थी, पर नहीं जा रही थी गटकी !

चाय खत्म होते ही, लगाना चाह रहा था घुडकी !!


जो काम सरकार लोकडाउन मे नहीं कर पाई !

ससुराल वालों ने एक ही दिन में थी समझाई ii

जय हो करोना माई iii जय हो करोना माई

 
 
 

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