हनुमान चालीसा की धूम क्यों ?
- rajaramdsingh
- May 1, 2022
- 4 min read
Updated: May 13, 2022
क्या किसी ने किसी को आज के पहले हनुमान चालीसा पढ़ने को रोका या पढ़ते वक्त टोका , या आपने अपने बच्चों को अपने घरों में भी मंगलवार या शनिवार को इसे पढ़ने के लिए कभी बाध्य किया, शायद नहीं ! लेकिन आज हम घंटों चलकर बीच सड़क पर इसका पाठ करने आते है , और हम अपने आपको हनुमान का भक्त बतलाते हैं । हम यह भुल गये है कि जब हम एक उँगली दूसरों पर उठाते है तो तीन उंगली अपने आप हमारे ऊपर उठ जाती है । हमें याद है जब हम छोटे बच्चे थे और जब पिताजी हमारी बाल छिलवाने ले जाया करते थे तो वे हजाम को निर्देश दें या ना दें , वह हमारे सिर के ठीक बीच में कुछ बाल अपने आप छोड़ देता था । बाल छोटा करवाने या बनाने पर भी वह उस टिक को नहीं काटता था लेकिन समय बदला , फैशन के मदहोश हो बच्चे क्या उनके पिताजी भी उस टिक या सीखा को रखने से कतराने लगे । पूजा पाठ , धूप आरती या तिलक चंदन भले हीं हमारे दादाजी करते थे परंतु हम क्या हमारी पिछली पीढ़ी ने ही अपने आप इसका परित्याग कर दिया । हमें तिलक लगाने या पारंपरिक वेश भूषा पहनने में शर्म आने लगी । हमने धोती कुर्ता के बदले पैंट शर्ट और जीन्स अपनाना शुरू कर दिया । यहां तक कि उपनयन संस्कार या शादी विवाह के पवित्र अवसर पर भी धोती कुर्ता का स्थान शेरवानी या शर्ट पेंट ने ले लिया । इन कपड़ों को पहनना हमें सुकून देने लगा और अगर आप पुनः इसकी शुरुआत करना चाहते हैं तो पहले अपने घर से इसकी शुरुआत करें , स्कूल कॉलेज में अनिवार्य करें और अगर तब आपका कोई विरोध करता है तब आप सड़क पर निकलें लेकिन घर में इसका नामोनिशान नहीं और सड़क पर बांटे ज्ञान , इसका मतलब आप राजनैतिक रोटी सेकने के चक्कर में आम जनता को करना चाहते हैं परेशान । हनुमान चालीसा के पाठ की आड़ में यह आपका हीरो बनने की कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है और आप हम आम जनता को पुनः अपने नाटक का हिस्सा बनाकर अपने साजिश का शिकार बनाने की फिराक में हैं ।
मंदिर में प्रतिदिन जाने की बात तो दूर किसी खास प्रयोजन पर भी ग्राम देवता या कुल देवता के दर्शन के लिए जाने पर भी हमने विलासिता अपनाया और जूते मोजे पहन ए. सी. और लग्जरी गाड़ी में बैठकर जाना पसंद किया है । न सिर्फ स्कूल कॉलेज बल्कि घर पर भी रामायण या गीता की जानकारी लेना या देना जरूरी नहीं समझा गया । रामायण या गीता हर घर में एक तो दिखता नहीं और अगर किसी के घर में दिख भी जाय तो सिर्फ अगरबत्ती दिखाने मात्र भर वह काम आता है । किसी ने कहा है सिर्फ गीता घर में रखने मात्र से या उसकी पूजा अर्चना करने से ही हमें उसका दिव्य ज्ञान नही मिल सकता , उसके अद्भुद ज्ञान के लिए हमें उसको पढ़ना और उसके ज्ञान को अमल में लाना ज़रूरी होता है ।
लोग आज हनुमान चालीसा का पाठ नहीं बल्कि अपनी राजनीति चमकाने के चक्कर में लगे हैं । ये वो लोग हैं जो चाहें तो इसे पाठ्यक्रम में लागू करवा सकते हैं । गीता और रामायण पढ़ना अनिवार्य करा सकते हैं परंतु ये उसे नहीं कर स्टेज पर , किसी के घर के सामने तो कहीं सड़क पर सार्वजनिक पठन कर सामाजिक सौहार्दता को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं । कहते हैं *अगर हनुमान चालीसा पढ़ना राजद्रोह है तो हम हर मंच पर इसे पढ़ेंगे* और अपने बच्चे को उस स्कूल में पढ़ने भेजते हैं जहां हिन्दू धर्म के देवी देवता को पूजने के बजाय जेसस को नमन करना सिखाया जाता है और यहां तक कि चंदन लगाकर स्कूल आने पर प्रतिबंध तक लगाया जाता है , फिर भी ये खुद प्रतिदिन अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने और लाने वहां जाते हैं क्योंकि वहां पढ़ाने में इनके बच्चों का भविष्य उज्जवल दिखता है ।
साथियों , आप जहां कहीं भी हैं अपने सामाजिकता को ठीक उसी तरह निभाएं जैसे आप वर्षों से निभाते चले आ रहे हैं । मैं पुछता हूँ अगर मुसलमान बुरा है तो डॉक्टर अब्दुल कलाम आजाद के नाम का प्रस्ताव राष्ट्रपति के लिए किसने दिया था , तीन तलाक बिल किसने पारित किया था या वर्षों से गरीब जनता को बिना भेद भाव किये चाहे वह हिन्दू हो या मुसलमान उसे मुफ्त का अनाज कौन दे रहा है ? प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत सरकारी आवास योजना का लाभ आप उसे दे रहे हो या नहीं ?
साथियों , न हिन्दू बुरा है न मुसलमान बुरा है । एक ही बगिया के हम दोनों बेहतरीन खुशबूदार फूल हैं जो भगवान को भी चढ़ाए जाते हैं और अल्लाह के दरगाह की ओर भी बढ़ाये जाते है । हाँ हमें उनका विरोध अवश्य करना है जो एक साजिश के तहत हमारी एकता को भंग करने की कोशिश करना चाहते हैं , चाहे वह टुकड़े टुकड़े गैंग हों , पत्थरबाज समूह हों या शाहीनबाग जैसे कट्टरपंथी । रामनवमी के शोभा यात्रा पर पत्थर फेककर हिन्दुधर्मावलम्बी को ठेस पहुंचाने अथवा सैकड़ों तलवार मंगवाकर दंगा भड़काने वालों के पीछे निश्चित रूप से कोई न कोई विदेशी ताकत या देशद्रोहियों का हाथ हो सकता है जिसकी जांच जरूरी है । ये लोग गुनाहगार हैं और इन गुनाहगारों को सलाखों के पीछे काल कोठरी में बंद करने के लिए हमारी सरकार एवं प्रशासन प्रयासरत्त है । हमें अपने अधिकारियों पर और न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोषा है । निश्चित रूप से उन अपराधियों को उनके किये की सजा मिलेगी और मिलनी भी चाहिए ।
जब उच्च न्यायालय ने निर्णय सुनाते हुए स्कूल के नियमों का पालन करने का आदेश दिया फिर भी अगर कोई इसे लेकर जहर उगल रहा हो तो निश्चित रूप से यह राजनैतिक रोटी सेकने की साजिश है जिसे हम न तो हिन्दु ज्यादा तबज्जो दें और ना ही मुसलमान हीं । बहुत हो चुका हिन्दू मुसलमान , अब हमें कृपया इंसान की तरह जीने दें और हमारा आपसी भाईचारा बरकरार रहे इसके लिए प्रयास करें । धन्यवाद
जय हिंद , वंदे मातरम ।
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