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छठ महिमा

  • rajaramdsingh
  • Nov 5, 2022
  • 1 min read

गौतम बुद्ध को बोध गया में

मिला ज्ञान का सार,

जिसने किया था बौद्ध धर्म का

दुनियाँ में प्रचार,

सिख के अंतिम गुरु गोविन्द सिंह,

पटना में जन्म लिए थे ,

सिख धर्म के बन अगुआई,

मानावता की रक्षा किये थे ।

महावीर ने जैन धर्म का

दुनियाँ में शान बढ़ाया ,

वही बिहार जो छठ पूजा को,

विश्व भ्रमण करवाया ।।

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कार्तिक मास, शुक्लपक्ष षष्ठी,

ख़तरों से खेल, रही थी सृष्टि ।

आभाष हो रहा महाप्रलय का ,

रुक नहीं रही थी अति वृष्टि ।।

पड़ रहे थे, दिन में ही पाला,

अंधेरों ने आकर, डेरा डाला ।

उल्टी गिनती, हुई शुरू ज़ब ,

लटक रहा था, कोर्ट में ताला ।।

त्राहिमाम मच गया जगत में,

पड़ गई प्रेतों की कुदृष्टि ।

कार्तिक मास, शुक्लपक्ष षष्ठी,

ख़तरों से खेल, रही थी सृष्टि ।।


हमने किया तब , कठिन प्रण,

मनाकर दिनकर, बचायेंगे वतन।

खरना का तब खीर खिलाकर ,

बच जाए सृष्टि किये कई जतन।।

फिर दिया संध्या अर्घ्य प्रथम ,

तिमिर से तिरोहित हो गई सृष्टि।

कार्तिक मास, शुक्लपक्ष षष्ठी,

ख़तरों से खेल, रही थी सृष्टि ।।


जैसे शबरी रंगी राम रंग में,

हुआ मगन जग छठ उमंग में ।

गए भास्कर अस्ताचल को ,

डटे रहे व्रती जल संग जंग में ।।

जय जयकार हुआ था तब ज़ब ,

भुवन भास्कार बचाई संस्कृति ।

कार्तिक मास शुक्लपक्ष षष्ठी,

ख़तरों से, खेल रही थी सृष्टि ।।


इसलिएआईये हमारे संग गाईये ,

मिलजुलकर छठ पर्व मनाइये ।

मीठे पकवान काअर्घ्य चढ़ाकार ,

सूर्यदेवता को करबद्ध मनाईये।।

ताजे फल फूल खेती से मंगाकर,

केला घौर का हाथ उठाईये।

छठी मैया से वचन निभाइये,

ठकुआ केला खाईये खिलाइये।।

***************************

राजाराम सिंह, 27अक्टूबर 2022

 
 
 

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