छठ हुआ लोकल से ग्लोबल
- rajaramdsingh
- Mar 21, 2022
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Updated: Feb 16, 2023
आस्था , पवित्रता एवं सूर्यदेव के पूजन का यह महापर्व बिहार (आज का बिहार एवं पुराना बिहार ,झारखंड) के लोगों का मूल पर्व है परंतु अब यह इतना विस्तार रूप पकड़ लिया है कि सिर्फ देश हीं नहीं विदेशों में भी इस महापर्व को बड़ी धूम धाम से मनाया जाने लगा है । हालांकि कोरोना का असर इस पर्व पर भी पड़ा है इसवर्ष फिर भी लोग इसको लेकर काफी उत्साहित हैं ।
चार दिवसीय इस महापर्व का आज तीसरा दिन है । आज व्रती संध्या काल डूबते सूर्य को नदी , तालाब या कृत्रिम तरीके से बनाये गए पोखर में गीले वस्त्र में हीं अर्घ्य देंगे तथा तब तक अन्न जल ग्रहण नहीं करेंगे जब तक वे पुनः अगले दिन सूर्य देव का दर्शन न कर लें ।
बिहार वासियों द्वारा शुरू किया गया यह पर्व अपने आप में बड़ा संदेश छिपाए बैठा है । बिहार वासी एक ऐसे संस्कार को संजोते हैं जिसमें त्याग होता है , पवित्रता होती है । उन्हें ये पता चल जाता है कि इनकी सत्ता भले ही चली जाय परंतु सुख दुख में इसने हमें साथ दिया है वे सदैव उसे याद रखता है । बिहार वासी का यह पर्व यह सिद्ध करता है कि भले हैं आपके सत्ता का अंत होने वाला क्यों न हो परंतु उन्होंने हमारे लिए तपा है , जला है या उनका उनपर किसी भी तरह का अगर उपकार है तो वे उनका मान , सम्मान एवं पूजन करने से कभी नहीं कतराते बल्कि वापस से उनके उदय की प्रतीक्षा में भी लीन रहते हैं जिसके लिए अब यह पर्व लोकल से ग्लोबल हो चुका है ।
अतः आस्था , समर्पण एवं पवित्रता के इस महान पर्व पर समस्त छठ व्रत प्रेमियों को संध्या अर्घ्य की आत्मिक बधाई । छठी मैया एवं सूर्य देव आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करें । धन्यवाद
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