तरुआ -बघरुआ ( मैथिलि )
- rajaramdsingh
- Mar 26, 2022
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बजिते घंटी मोबाइल कय , तूफ़ान मचि गेल ।
जायब सासुर, ई बुझिते , बोखार भागि गेल.. बोखार भागि गेल ।। बजिते घंटी मोबाइल कै २
ठंढी झेलैत हम सासुर पहुंचलौं ,दरबज्जै पर अपन साली सँ भेटलों।
हुनक मीठ मुस्कान सँ थकान भागि गेल.... , थकान भागि गेल ..।। बजिते घंटी मोबाइल कै २
बाल बादल कय घटा सन लगै यै , होठ गुलाबी चम चम करै यै
आहाँक नागिन सं चाल देखि , भूचाल आबि गेल ...भूचाल आबि गेल । बजिते घंटी मोबाइल कै २
आँखि मृगा सन , मृदुल वाणी , होश उड़ाबई आहाँक चढ़ल जवानी ।
आहाँक पातर कमर सँ, करेंट लागि गेल ... करेंट लागि गेल ...।। बजिते घंटी मोबाइल कै २
अबिते बजाहत आँगन पहुंचलौं , नबकी सरहज सँ भानस में भेटलों ।
खाइते तरुआ बघरुआ , पिआस जागि गेल ...पिआस जागि गेल ।। बजिते घंटी मोबाइल कै २
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