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माँगूं एक उपहार

  • rajaramdsingh
  • Oct 18, 2024
  • 2 min read

Updated: Oct 23

केक काट जन्मदिन मनाते ,

पहनते हम पश्चिमी परिवेश ,

छोड़ रहे पैर छूना बड़ों का ,

जो देता आशीष अशेष।।


अपनों का करूं व्यक्त आभार ,

या खेद प्रकट करने पर विचार ।

छोड़कर अपनी श्रेष्ठ संस्कृति ,

पश्चिमी सभ्यता से करते प्यार ।।

नहीं डरेंगे जोर देकर कहेंगे ,

अपनी संस्कृति है सबमें विशेष ।

छोड़ रहे पैर छूना बड़ों का ,

जो देता आशीष अशेष ।।


पूजा करते बुता के कैंडल ,

खाते पहन पैर में सैंडल ।

नहीं देखते अपने पराए ,

दारू पी खुश शिष्टमंडल ।।

खुशी के हर मौके को पहले ,

लड्डू बांट बनाते थे विशेष ।

छोड़ रहे पैर छूना बड़ों का ,

जो देता आशीष अशेष ।।


संस्कृति हमारा सबसे न्यारा ,

तमसो मां ज्योतिर्गमय प्यारा ।

फंसते जा रहे दल दल में हम ,

कैसे मिलेगा इससे छुटकारा ।।

खाते हम खुशियों में पिज़्ज़ा ,

बिगाड़े क्यों न स्वास्थ्य विशेष ।

छोड़ रहे पैर छूना बड़ों का ,

जो देता आशीष अशेष ।।


नहीं चलेगा अब कोई बहाना ,

गैर धात्विक में बंद करें खाना ।

तांबा फूल पीतल या चांदी ,

या केले का पत्ता अपनाना ।।

हमारे पूर्वजों की जो है धरोहर ,

उसमें है ज्ञान , विज्ञान विशेष ।

छोड़ रहे पैर छूना बड़ों का ,

जो देता आशीष अशेष ।।


उजाड़ा जिसने अनेकों घर ,

दारू मचाया घर घर कहर ।

फिर भी हम उसको अपनाते,

बांट रहा जो मीठा जहर ।।

खाओ कसम उसे दूर भगाएं ,

जो विदेशों के लिए विशेष ।

छोड़ रहे पैर छूना बड़ों का ,

जो देता आशीष अशेष ।।


मांगू आज मैं एक उपहार ,

धूम्रपान से करें इनकार ।

रहेगी काया सुंदर स्वस्थ ,

होगी नहीं अपनों से तकरार ।।

हाथ जोड़ करूं विनती सबसे,

सँवारें अपनी संस्कृति विशेष ।

छोड़ रहे पैर छूना बड़ों का ,

जो देता आशीष अशेष ।।

*************************************

राजाराम रघुवंशी,नवी मुंबई, 18 Oct 2024

 
 
 

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