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देशरत्न डॉ राजेन्द्र भवन*

  • rajaramdsingh
  • Mar 21, 2022
  • 1 min read

Updated: Feb 16, 2023

वर्षा उड़ाती धूल फूल से , अंधकार मिटे उजाले से । भक्तों के संकट भी मिटता , माता की ज्योत जगाने से ।।


वीणापाणी की बात निराली , सेवक घर देती खुशहाली । हुआ शुभारंभ उनका पूजन , खुश हो भर दी सबकी झोली ।।


महानगर में सम्मान बढ़ाने , खुद की नई पहचान बनाने । निकल पड़े संकल्प लेकर , बिहरियन से बिहारी कहलाने ।।


अपनों से कुछ बात बताये , उनके सपनों को भी सजाये । इतिहास रचने की बात बता , जन जन में उत्साह जगाये ।।


पैसे नहीं थे तो सदस्य बढ़ाए , नए नए कुछ कदम उठाए । किसी ने दिया प्यार तो कोई , करके उपहास उन्हें ठुकराए ।।


पर उन्होंने मन से बीड़ा उठाया , जगह लिया और भवन बनाया । समझ गुलाब में होते कांटे , उसने सबको गले लगाया ।।


बाहरी ईंटें जो बाद में आती , रंगों से वह चमकाई जाती । सचमुच पूज्यनीय वह इंट है , जो नीव बन अपनी स्तित्व मिटाती ।।


करते उन नारायण को नमन , जिसने बनाया यह राजभवन । बिहार मित्र मंडल के सौजन्य से "देशरत्न डॉक्टर राजेन्द्र भवन" ।। **********************************

 
 
 

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