पटाखे से प्रदुषण
- rajaramdsingh
- Mar 27, 2022
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Updated: Feb 15, 2023
वर्षा ऋतू के जाते हीं त्योहार आते हैं ,
हम प्यार लुटाते एक दूजे से प्यार पाते हैं ।
दीपों की माला से सजाते अपना घर आँगन ,
पर छोड़ पटाखे भू मंडल में जहर फैलाते हैं ।।
करबद्ध निवेदन करता हुँ तू रोक लो इसको ,
जन जन से निवेदन करता हुँ तू साथ दो हमको ।
इस जहरीले प्रदुषण से तू मुक्त करो जग को
मैं रोकूं अपने बच्चों को तुम अपने बच्चों को ।।
उन भूखे सोने वालों को तुम रोटी दे देते ,
या वस्त्रहीन बुज़ुर्गों को तुम धोती दे देते ।
पैसों में आग लगाने से तो ये अच्छा होता ,
कि बुझ रहे प्रतिभाओं के तुम दीप जला देते ।।
नहीं माँगते नए वस्त्र ना मांग रहे हैं थाली ,
स्वस्थ रखो तुम जीजा सालीऔरअपनी घरवाली ।
अगर चाहते तुम भी देना धरती को उपहार ,
करके मुक्त प्रदुषण ,भारत में भर दो खुशहाली।।
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