पूजो जिनकी तुम हो संतान
- rajaramdsingh
- Dec 14, 2022
- 1 min read
Updated: Oct 3, 2023
ठंढ सताती हाड हिलाती,
फिर भी उठ माँ आती
कड़ाके की ठंढ हड्डी हिलाती ,
बड़े बुज़ुर्गो को खूब सताती ।
फिर भी सबसे पहले जगकर,
चाय बना माँ सबको पिलाती ।।
रीढ़ का भले हीं ऑपरेशन हुआ हो ,
चलती समझो परमेश्वर क़ी कृपा हो ।
बिन गलती भी क़ोई क्यों न डांटे ,
देती दुआ कहती तुम्हारा भला हो ।।
ज़ब भी परदेश से पैतृक आता ,
देख हालात मैं आंसू बहाता ।
सोचता छोड़कर कमाई धमाई ,
माँ बाप के संग जीवन बिताता।।
काटकर पेट जिसने पुत्र पाला ,
आर्थिक तंगी में उसे संभाला ।
भेजकर नौकरी धंधे में उसको ,
खुद पर मुसीबत का बोझ डाला ।।
कड़ाके की ठंढ में झाडू लगाती,
बर्तन धोकर चौका में लग जाती ।
दाल भात संग तरुआ- तिमन ,
तरह तरह के पकवान खिलाती ।।
हमें डांट कर दूध पिलाती,
खुद वह बासी रोटी खाती ।
बंद कराकर हमारी खिड़की ,
शीतलहरी में बाहर सो जाती।।
अगर बनना हो सचमुच महान,
करो अपने माँ बाप का सम्मान।
तीर्थ यात्रा पर जाना है अच्छा,
पर पूजो जिनकी तुम हो संतान।।
****************************
राजाराम सिंह 13 दिसंबर 2022
Comments