प्रेम पूर्वक प्रणाम
- rajaramdsingh
- Mar 21, 2022
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Updated: Mar 26, 2022
कई महीने जन्मभूमि की ,
सेवा सुश्रुषा के बाद ।
गांव गृहस्थी खेती बाड़ी ,
अपनों की फरियाद ।।
फिर भी सता रही थी ,
आपकी तन्हाई ।
कहां मिलेगा जग में ,
आप जैसा मानक भाई ।।
चुनाव में भी सदा ,
होती थी आपकी चर्चा ।
बिन आमदनी कभी भी ,
रुकता नहीं था खर्चा ।।
अपनापन की अद्भुद यादें ,
खीचकर हमें ले आई ।
फ्लाइट लैंडिंग होते हीं
सपनों ने ली अंगराई ।।
सबसे पहले कर्मभूमि पर ,
लूँ सिद्धिविनायक का नाम ।
फिर सभी श्रेष्ठ जनों को ,
प्रेम पूर्वक प्रणाम ।।
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