बाराती, समधी स्वागत एवं जयमाला शायरी
- rajaramdsingh
- Mar 9, 2024
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Updated: Dec 9, 2025
समधी के सम्मान में
सरल व्यक्तित्व में सकून क़ा सार दिखता है,
मधुर वाणी में प्रभु क़ा प्यार दिखता है।
फ़रिश्ते सुने थे कभी हम लेकिन
समधी साहब में उनका सार अपार दिखता है।।
बनकर अतिथि देव पधारे स्वागत करें स्वीकार,
आप द्वार हमारे आये हैं, सहज़ लुटाते प्यार।
साधन कम पर भाव विह्वल है, स्वागत को श्रीमान,
आशा है स्वीकार करेंगे, भाव- सुमन क़ा प्यार।
खिल उठा है मन कमल, हुए हम गुलज़ार,
भावों के उपवन ने लाई, पुष्पों की बहार ।
दिल से दिल मिला तो गूंज उठी शहनाई ,
कृपा पात्र हम आपके अनुग्रहकिया स्वीकार।।
स्वीकार किया हमें, रखा हमारा मान।
प्रकट करूँ कृतज्ञता, स्वागत है श्रीमान ।।
बाराती स्वागत में...
आते हैं जिस भाव से, भक्तों के घर भगवान,
उसी भाव से पधारे हैं, आप जैसे मेहमान।
अरमाँ दिलों के पास लाये हैं
खुशियों भरी सौगात लाये हैं
फूलों की बात छोडो साहब,
हमने आपके स्वागत में अपना दिल बिछाये हैं
हार को जीत की दुआ मिल गई
शरद में वसंत की हवा चल गई
आपके आने से यूँ लगा जैसे
तत्काल तकलीफ को दवा मिल गई
जय माला के लिए लड़की के आते वक़्त
इंतज़ार जिन पलों क़ा था, वो सुन्दर घड़ी आ गई,
एक दूजे को अपनाने, देखो प्यारी परी आ गई।
ख़त्म हुआ इंतज़ार , व्यक्त करते
आभार
लेकर जयमाला भाई संग, राजदुलारी आ गई।।
जय माला के बाद
दो राही के मिलने से ह्रदय कमल मुस्कुराये,
गम हुआ कोसों दूर, खुशियाँ खिलखिलाये।
स्वर्गलोक से हो रहे, आशीषमय पुष्पवृष्टि,
कन्या होवे सुहागवती, वर चिरंजीवी बन जाए।।