बिकाऊ है वेलेंटाइन
- rajaramdsingh
- Apr 14, 2022
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बिक रहे थे रिश्ते , बेशर्मियों के व्यापार में ।
रुक गए कदम , जब पहुंचे इन बाज़ार में ।।
न सभ्यता , न संस्कृति , न चलता यहां शरीफों का ।
मैंने पूछा क्या भाव है भाई, इन बनाबटी रिश्तों का ।।
दुकानदार बोला ,क्या चाहिए ,स्टूडेंट्स,जॉब वाली या भाभी ।
आज वेलेंटाइन है नहीं जमें तो , मांग सकते हो माफ़ी ।।
क्षणिक दुःख बांटने वाली मिलेगी , दुःख में भी डांटने वाली मिलेगी ।
गुलाब का फूल देकर हस्बैंड , बना सकते आज अपना गर्लफ्रेंड ।।
बाबूजी , कुछ तो बोलो , कैसी चाहिए जवान खोलो ।
कब से अकेले खड़े हो , जैसे लगता है बहुत डरे हो ।।
दबी जुबान से मैंने बोला , क्या मिल सकता है दोस्त।
जो दुःख दर्द में हाथ बटाये , जीवन संगिनी बन साथ निभाए।।
जो रहे दुःख में सदैव साथ , बटाये गरीबी में अपना हाथ ।
करके सेवा माँ बाप की , परिवार को देवे भरपूर साथ ।।
दुकानदार आगे बढ़ गया , बात अनसुनी कर सीधा निकल गया ।
उसके पास कोई जबाब नहीं था ,उनकी संस्कृति से बिलकुल परे था ।।
वेलेंटाइन का रिश्ता बिकाऊ है दोस्त , जो भारतीय संस्कृति से है परे।
हमारी रीति रिवाज़ अपनाने तो , पूरी दुनिया है मुंह बाए खड़े।।
हमारे रिश्ते अनमोल होते , जिसे सरेआम नीलाम नहीं करते।
काश ! आज के दिन सेना और अपने माँ बाप को याद करते।।
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