बिहार दर्शन भाग 1
- rajaramdsingh
- May 18, 2022
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Updated: Jun 2, 2022
जहां बरसता हर घर में , माँ सरस्वती का प्यार ,
बूढी गंडक कमला कोसी , माँ गंगा की धार ।
खेतों में हरियाली जैसे , ब्रह्मदेव का प्यार ,
ये है मेरा बिहार , ये है मेरा बिहार ।।
जग जननी मां जगदम्बा का , हुआ यहीं था अवतरण ,
एक हाथ से धनुष उठाई , जनक जान किये स्वंवर प्रण ।
जो तोड़ेगा शिव धनुषा को, होगी उनकी आज सिया ,
देश विदेश से आये योद्धा, बनने को सिया के पिया ।।
भूप अकेला हिला सका न , मिलकर सारे एक ही वार ,
विष्णु रूप अवतार पुरुष का ,माँ सीता को था इंतज़ार ।
तब आये ब्रह्माण्ड नायक , सीता ने पहनाई हार ,
ये है मेरा बिहार , ये है मेरा बिहार ।।
भोले शंकर शिव त्रिपुरारी, आये मिथिला धाम ,
चाकर बनकर विद्यापति घर, किये थे वर्षों काम ।
जाते थे नजदीक नदी में ,खोल जटा करते स्नान ,
रेत उठाते भष्म लगाते,भक्तों को करते प्रणाम ।।
लगी प्यास विद्यापति को ,जंगल में जल ले आये ,
माया ने तब जाल बिछा ,इनको कैलाश बुलाये ।
चले गए पर उगना महादेव , बन करते उद्धार ,
ये है मेरा बिहार , ये है मेरा बिहार ।।
जहां बरसता हर घर में , माँ सरस्वती का प्यार ,
बूढी गंडक कमला कोसी , माँ गंगा की धार ।
खेतों में हरियाली जैसे , ब्रह्मदेव का प्यार ,
ये है मेरा बिहार , ये है मेरा बिहार ।।
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