बिहार दर्शन भाग 2
- rajaramdsingh
- May 18, 2022
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जहां बरसता हर घर में,माँ सरस्वती का प्यार ,
बूढी गंडक कमला कोसी,माँ गंगा की धार ।
खेतों में हरियाली जैसे , ब्रह्मदेव का प्यार ,
ये है मेरा बिहार , ये है मेरा बिहार ।।
मिथिला का है दिल दरभंगा,और दरभंगा राज ,
होता था सब काम यहीं से , रहते थे महाराज ।
बना यहां है संस्कृत और,मिथिला विश्वविद्यालय ,
जो था पहले दरभंगा , महाराज का आलय ।।
महाराज ने खूब बढ़ाया ,था किसान की आय ,
हेलीकाप्टर से करवाया ,था उसने व्यवसाय ।
बेरोजगारों को चीनी जूट , पेपर मील रोजगार ,
ये है मेरा बिहार , ये है मेरा बिहार ।।
देश विदेश में दरभंगा , पैलेश थे बनवाये ,
दान देकर अपना सबकुछ, दानवीर कहलाये ।
बी एच यु का सबसे पहला, चेयरमैन बने थे ,
शिक्षा की है ज्योत जगानी,खून में सोच सने थे ।।
देशभक्ति में ओतप्रोत, ये नही कभी मुंह खोले ,
डूब जाता है दरभंगा पर ,नहीं किसी से बोले ।।
नमन करूँ कामेश्वर सिंह,जिनका उच्च विचार ,
ये है मेरा बिहार , ये है मेरा बिहार ।।
थानेश्वर कपलेश्वर बाबा , कुशेश्वर धाम ,
उच्चैठ दुर्गामाताजी का ,जग में बड़ा हीं नाम ।
इनको प्रेम से जो भी पूजे ,बिगड़े काम बनाये ,
जीवन जाता है सवर जब,आशिष इनका पाए ।।
एक भक्त जो भक्ति करके ,था पाया वरदान ,
एक रात में बुद्धू से वह ,बन गया विद्वान् ।
कालीदास को माँ ने दिया , विद्या का उपहार ,
ये है मेरा बिहार , ये है मेरा बिहार ।।
जहां बरसता हर घर में,माँ सरस्वती का प्यार ,
बूढी गंडक कमला कोसी,माँ गंगा की धार ।
खेतों में हरियाली जैसे , ब्रह्मदेव का प्यार ,
ये है मेरा बिहार , ये है मेरा बिहार ।।
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