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ममतामयी माँ

  • rajaramdsingh
  • Mar 21, 2022
  • 1 min read

मायके की चौकठ लांघकर , परिवार को रखने बांधकर । सब कुछ छोड़ चली आती , अरमानों को त्यागकर ।।


संसार नया परिवार नया , नाते रिश्ते की भी हया । अर्धांगिनी पतिदेव की , बन जाती उनकी विजया ।।


रखती ध्यान प्रिय पति का , उनके विकास की गति का । बच्चों का भी लालन पालन , और उसकी ख्याति का ।।


ठंढी गर्मी या हो बरसात , उठती सदैव सबके साथ । घर का सारा काम निपटा , सोती घर में सबके बाद ।।


किसने कुर्ते किधर धरे , अपनी जिद पर कौन अड़े । रखती सबका ध्यान सदा , उत्तरदायित्व में उतरे खड़े ।।


बेटी बहन ननद थी कभी , बहु पत्नि भाभी मां अभी । एकदिन बनती बुढ़िया सास , भारतवर्ष की नारियां सभी ।।


ये ग्रंथों में पवित्र गीता हैं , पतिव्रता सावित्री सीता हैं । हमें पेट में पालने वाली , प्रसव पीड़ा को जीता है ।।


नमन करूँ उस नारी को , झेलती जटिल बिमारी को । दुख में सुख से रहने वाली , ममतामयी मां प्यारी को ।।

 
 
 

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