बिहार दर्शन ( प्रथम भाग )
- rajaramdsingh
- Apr 4, 2022
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Updated: Jul 2, 2024
जहां बरसता हर घर में , माँ सरस्वती का प्यार ,
बूढी गंडक कमला कोसी , माँ गंगा की धार ।
खेतों में हरियाली जैसे , ब्रह्मदेव का प्यार ,
ये है अपना बिहार , ये है अपना बिहार ।।
जग जननी मां जगदम्बा का , हुआ यहीं था अवतरण ,
एक हाथ से धनुष उठाई , जनक जान किये स्वंवर प्रण ।
जो तोड़ेगा शिव धनुषा को, होगी उनकी आज सिया ,
देश विदेश से योद्धा आये, बनने को सिया के पिया ।।
भूप अकेला हिला सका न , मिलकर सारे एक ही वार ,
विष्णु रूप अवतार पुरुष का ,माँ जानकी को इंतज़ार ।
तब आये ब्रह्माण्ड नायक , सीता ने पहनाई हार ,
ये है अपना बिहार , ये है अपना बिहार ।।
भोले शंकर शिव त्रिपुरारी, आये मिथिला धाम ,
चाकर बनकर विद्यापति घर, किये थे वर्षों काम ।
जाते थे नजदीक नदी में , खोल जटा करते स्नान ,
रेत उठाते भष्म लगाते,भक्तों को करते प्रणाम ।।
लगी प्यास विद्यापति को ,जंगल में जल ले आये ,
माया ने तब जाल बिछा ,इनको कैलाश बुलाये ।
चले गए पर उगना महादेव ,बन करते उद्धार ,
ये है अपना बिहार , ये है अपना बिहार ।।
सिखों के गुरू गोविंदसिंह पटना में जन्म लिए थे ,
जैन धर्म भगवान महावीर वैशाली में हुए थे ।
देता है आवाज वीणा , सही कसो जब तार ,
बोध गया में गौतम बुद्ध को, मिला ज्ञान का सार ।।
रामभद्र भी आकरके बक्सर में शिक्षा पाई ,
धनुष बाण की भी शिक्षा ये गुरु वशिष्ठ से पाई ।
बालापन में किए थे तब कई राक्षस का संहार
ये है अपना बिहार , ये है अपना बिहार ।।
पाटलिपुत्र से अपना शासन चंद्रगुप्त करता था ,
शाहजहां का सिंहासन सासाराम में रहता था ।
हरिश्चन्द्र तारा का बेटा जिसका था रोहितास ,
उसके नाम पर बना जिला नाम पड़ा रोहतास ।।
बना हुआ है सासाराम में शेरशाह का मकबरा,
आजादशत्रु शासक सबको लेकर पटना चल पड़ा ।
जरासंध के द्वंद अखाड़े का होता अब भी दीदार,
ये है अपना बिहार , ये है अपना बिहार ।।
अशोक सम्राट का बहुत बड़ा था फैला साम्राज्य
पाटलिपुत्र थी राजधानी,अखंड भारत राज्य ।
म्यां बलू अफगानिस्तान, पर था जिसका शासन ,
ईरान भूटान पाक बँगला,का भी था सिंहासन ।
दिखता अशोक स्तंभ अब भी ,थाई चीन श्रीलंका ,
बौद्ध धर्म का कर प्रचार ये , बजा दिए थे डंका ।
खूब किया था विश्वविद्यालय नालंदा विस्तार ,
ये है अपना बिहार , ये है अपना बिहार ।।
मिथिला का है दिल दरभंगा,जहां दरभंगा राज ,
होता था सब काम यहीं से , रहते थे महाराज ।
जहां बना है संस्कृत औ, मिथिला विश्वविद्यालय ,
जो था पहले दरभंगा , महाराज का आलय ।।
लोग सुखी थे बढ़ी खूब थी तब किसान की आय ,
हेलीकाप्टर से करवाया ,था उसने व्यवसाय ।
मिटाने यहां की बेरोजगारी खोला कई व्यापार ,
ये है अपना बिहार , ये है अपना बिहार ।।
देश विदेश में दरभंगा , पैलेश भी बनवाये ,
देकर दान भारतवर्ष को दानवीर कहलाये ।
बी एच यु का सबसे पहला, चेयरमैन बने थे ,
ज्योत जगानी,है शिक्षा की खून में सोच सने थे ।।
देशभक्ति में ओतप्रोत ये, नही कभी मुंह खोले ,
डूब जाता दरभंगा पर ,नहीं किसी से बोले ।।
नमन करूँ कामेश्वर सिंह था,जिनका उच्च विचार ,
ये है अपना बिहार , ये है अपना बिहार ।।
थानेश्वर कपलेश्वर बाबा , कुशेश्वर धाम ,
उच्चैठ दुर्गामाताजी का ,जग में बड़ा हीं नाम ।
इनको प्रेम से जो भी पूजे ,बिगड़े काम बनाये ,
जीवन जाता है सवर जब,आशिष इनका पाए ।।
एक भक्त जो भक्ति करके ,था पाया वरदान ,
एक रात में बुद्धू से वह ,बन गया विद्वान् ।
दी थी मां ने कालीदास को विद्या का उपहार ,
ये है अपना बिहार , ये है अपना बिहार ।।
पांड गांव में पांडव का,बना हुआ है चौका ,
जले पांच थे इसी बगल में है गांव पचपैका ।
लोगों ने जब समझा राज,दिखलाया था प्यार ,
सुरंग खोदकर बचा लिया,पांडव का परिवार ।।
धौम्य ऋषि थे बड़े हीं ज्ञानी , धर्मवीर गंभीर ,
जिन्हें बनाया था पुरोहित ,धर्मराज युधिष्ठिर ।
पांचाली के स्वंवर में था , जो बड़ा किरदार ,
ये है अपना बिहार , ये है अपना बिहार ।।
उदयनाचार्य की उदारता को जगन्नाथ जी जान गए ,
देकर के वरदान उनको , पूरी में सम्मान किये ।
करता खूब सरैसा खेती , हैं किसान अभिमान
लोकगायिका शारदासिन्हा,की है अद्भुद तान ।।
कृषि अनुसंधान में पूसा, का है अदभुद नाम ,
चार जिला गंगाजी मिलाती , नाम चौमथ धाम ।
किये स्नान जहां विद्यापति,तो खुला मोक्ष का द्वार ,
ये है अपना बिहार , ये है अपना बिहार ।।
गणतंत्र हुआ था सबसे पहले, दुनिया में वैशाली ,
गांधी सेतु के बनने से, क्षेत्र में है खुशहाली ।
गज ग्रह का कोनहारा में , खूब हुई थी लड़ाई ,
भीषण युद्ध को देख सुदर्शन,चक्र विष्णु,उठाई ।।
शिवविष्णु का रूप हरिहर,का मंदिर दिखता है,
सबसे बड़ा पशु का मेला , भी यहीं लगता है ।
हाजीपुर का नामी केला , और बीज ब्यापार ,
ये है अपना बिहार , ये है अपना बिहार ।।
मिथिला पेंटिंग आन मेरी , छठ पूजा है शान ,
धोती कुर्ता सिर पर पगड़ी , है अपनी पहचान ।
पिंडदान गया में करके, करते पितरों का उद्धार ,
ऋषि पतंजलि यहीं हुए थे , आयुर्वेदाचार्य ।।
याद करो सर्जिकलस्ट्राइक और गलवन की गरिमा ,
गाये जाएंगे दुनिया में, बिहार रेजिमेंट की महिमा ।
चौथेपन में वीर कुंवर ने, उठा लिया नंगी तलवार ,
ये है अपना बिहार , ये है अपना बिहार ।।
हर्षित हुए थे शंकराचार्य,मंडन मिश्र के ज्ञान से ,
जाने जाते हैं आर्यभट्ट,ज्योतिषाचार्य के नाम से ।
जगजीवन, राजेन्द्रबाबू , जय प्रकाश नारायण ,
गणित जगत में गणितज्ञ ,थे वशिष्ठ नारायण ।।
सुन्दर नारी बनी अहिल्या, जो थी कभी पहाड़ ,
बिस्मिल्ला की शहनाई से, दुनिया करती प्यार ।
राजभवन जिसका करता था स्वागत शानदार
ये है अपना बिहार , ये है अपना बिहार ।।
दही चुरा तरुआ तीमन, नामी मालदह आम ,
बरी कचरी झिल्ली मुढ़ी, पग पग पान दूकान ।
लालगंज का नामी खजुरी,बिहारशरीफ अनरसा ,
लड्डू मनेर,आम अदभुद, उगाता जिला सहरसा ।।
गया तिलकुट, लाई बाढ़ ,चुरा मिर्चाधान का ,
भागलपुर कतरनी चुरा ,खाजा सिलाब शान का ।
लिट्टी चोखा खूब कर रहा, दुनिया में व्यापार ,
ये है अपना बिहार , ये है अपना बिहार ।।
मैथिली वज्जिका अंगीका भोजपुरी है भाषा ,
हो जाता बर्बाद फसल, फिर भी खेती अभिलाषा ।
सामा चकेबा जौड़ जटी , सतुआनी त्यौहार ,
जुड़शीतल चौठीचांद कोजगडा का भार ।।
छठ पूजा की कठिन तपस्या ,देख दंग है दुनिया ,
सरस्वती माता को प्रसाद में, चढ़ता है बेर बुनियाँ ।
होली को मत लेना हल्का , माल पुआ उपहार ,
ये है अपना बिहार , ये है अपना बिहार ।।
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