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विज्ञान बचाया जान

  • rajaramdsingh
  • Mar 21, 2022
  • 2 min read

Updated: Feb 17, 2023

पहली लहर ने कहर बरपाया ,बूढ़े बुज़ुर्गों को बहुत सताया । कोरोना नहीं यह जानी दुश्मन ,सृष्टि संहारक बनकर छाया ।।


लॉकडाउन लग जाने से ,व्यापार बन्द हो जाने से । अर्थव्यवस्था अनाथ हुआ ,मजदूरों के चले जाने से ।।

खाली पेट रह खूब चलाया ,कमासूत ने भी हाथ फैलाया । कोरोना नहीं यह जानी दुश्मन ,सृष्टि संहारक बनकर छाया ।।


लोग थे जो संभल रहे , नया करने को निकल रहे । तबतक दूसरी लहर का कहर ,काल बन करके चल पड़े ।।

शुरू काम फिर बंद कराया , नुकशान करके घर बैठाया । कोरोना नहीं यह जानी दुश्मन ,सृष्टि संहारक बनकर छाया ।।


पूरा देश त्राहिमाम कर रहा ,साधारण बुखार से भी डर रहा । सरकारी हो या प्रायवेट ,अस्पताल जाने से घबर रहा ।।

झोला छाप डॉक्टर बुलवाया ,घर में शुरू इलाज करवाया । कोरोना नहीं यह जानी दुश्मन ,सृष्टि संहारक बनकर छाया ।।


कुछ दरिंदे की दरिंदगी ,छीन रही है ज़िन्दगी । नकली इंजेक्शन बेचकर ,फैला रहे हैं गंदगी ।।

लेकिन वह दुष्ट पकड़ाया ,काल कोठरी की शोभा बढ़ाया । कोरोना नहीं यह जानी दुश्मन ,सृष्टि संहारक बनकर छाया ।।


किशोर किशोरी पहलवान , अनेकों की ले ली इसने जान । देखकर भीड़ श्मशान में ,लाश भसा किये गंगा स्नान ।।

वायरस ने इतिहास रचाया ,श्मशान में टोकन बंटवाया । कोरोना नहीं यह जानी दुश्मन ,सृष्टि संहारक बनकर छाया ।।


अब काला फंगस आ रहा ,ठीक हुए पेशेंट को सता रहा । किसी की आंख नाक कान ,तो किसी की हड्डी गला रहा ।।

कैसी महामारी धरा पर आया ,एक के बाद दूसरे ने सताया । कोरोना नहीं यह जानी दुश्मन ,सृष्टि संहारक बनकर छाया ।।


हमने जब आवाज़ लगाई ,पूरी दुनियां ने हाथ बढ़ाई । पर कोरोना के कहर से ,हमारी व्यवस्था चरमराई ।।

मदद मांगाने पर मदद आया ,पर हालात पर उंगली उठाया । कोरोना नहीं यह जानी दुश्मन ,सृष्टि संहारक बनकर छाया ।।


अब तो तीसरी लहर आ रही , जो नन्हें बच्चे को सता रही । लगता है विज्ञान वरदान नहीं ,अभिशाप बनती जा रही ।।

वैज्ञानिको ने भी खूब सताया ,खतनाक वायरस को बनाया । कोरोना नहीं यह जानी दुश्मन ,सृष्टि संहारक बनकर छाया ।।


क्या कहती राष्ट्र संघ नीति ,क्या यही है अंतरराष्ट्रीय रीति । जो हैं जैविक हथियार निर्माता ,कब तक करोगे उससे प्रीति ।।

जिसने पूरा विश्व सताया ,क्यों उसे तुम मित्र बनाया । कोरोना नहीं यह जानी दुश्मन ,सृष्टि संहारक बनकर छाया ।।


हे वैज्ञानिकों वाण चलाओ ,विज्ञान को वरदान बनाओ । बन चुका अभिशाप यह ,इस कलंक को शीघ्र मिटाओ ।।

ज्ञान ने विज्ञान बनाया ,मुसीबत में सदा राह दिखाया i कोरोना नहीं यह जानी दुश्मन ,सृष्टि संहारक बनकर छाया ।।

 
 
 

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