वीरांगना दामिनी
- rajaramdsingh
- Mar 26, 2022
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Updated: Mar 28, 2022
मैं करबद्ध होकर बार बार पूछता हूँ ,
क्या कोई लौटा सकता है उसकीअश्मत ।
या उस प्यारी बच्ची के जिवंत सपने ,
जो बदल दे उसकी किश्मत ।।
दरिंदे तुमने क्या हासिल किया ,
एक कोमलांगिणी की किश्मत उजाड़ के ।
हवस बुझाने के खातिर एक ,
वीरांगना की बगिया बिगाड़ के ।।
वह जो सपनों के सागर में गोते लगा ,
आसमान नापना चाहती थी ।
पढ़ लिख अपने पैरों पर खड़ा हो ,
दूध का क़र्ज़ उतारना चाहती थी ।।
तेरे कुकर्म के खातिर वह ,
परलोक में प्रविष्ट हो गई।
शिकार हो दरिंदगी की ,
अग्नि में समाविष्ट हो गई।।
अश्रुपूर्ण हो गई मेरी आँखें ,
समझो मेरे ह्रदय की भावना ।
स्वीकार करो विनम्र श्रद्धांजली ,
हे दामिनी भारतीय वीरांगना ।।
मुझे नहीं पता स्वर दब जाएगा ,
या दबा दिया जाएगा ।
उसे याद भी रखा जाएगा ,
या भुला दिया जाएगा ।।
वह चली गई दोबारा नहीं आने को ,
किसी और अबला को नहीं सताने को ।
आँख खोलो और खुद को जगाओ ,
साथ चलो जग को जगाने को ।।
हमें चाहिए कर्तव्यनिष्ठ सरकार ,
जो रक्षा करने में हो कामयाब ।
भले हीं हो प्रतिकूल परिस्थिति पर ,
भारतीय संस्कृति से जिसे हो लगाव ।।
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