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वेलेंटाइन

  • rajaramdsingh
  • Mar 22, 2022
  • 1 min read

Updated: Mar 28, 2022

बिक रहे थे रिश्ते , बेशर्मियों के व्यापार में । रुक गए थे कदम जब , पहुंचे इन बाज़ार में ।।


न सभ्यता न संस्कृति , न चलता यहां शरीफों का । मैंने पूछा क्या भाव है भाई , इन बनाबटी रिश्तों का ।।


दुकानदार बोला कौन चाहिए , स्टूडेंट्स , जॉब वाली या भाभी । आज वैलेंटाइन है नहीं जमे तो, मांग सकते हो इनसे माफी ।।


क्षणिक दुख बांटने वाली मिलेगी , दुख में भी डांटने वाली मिलेगी । गुलाब का फूल देकर हसबैंड भी, आज बना सकता है गर्लफ्रेंड।।


दुकानदार बोला हाँ बाबूजी , कैसी चाहिए मुंह तो खोलो । कब से अकेले चुपचाप खड़े हो , जैसे लगता है बहुत डरे हुये हो ।।


दबी जुबान से मैने बोला , क्या मिल सकता है हमें दोस्त ? जो दुख दर्द में हाथ बटाये , जीवन संगिनी बन साथ निभाये।।


वैलेंटाइन का रिश्ता बिकाऊ है , जो है भारतीय संस्कृति से परे । हमारी रीति रिवाज अपनाने को , तो पूरी दुनियां है मुँहबाये खड़े ।।


हमारे रिश्ते अनमोल होते हैं , सरेआम नीलाम मत करो । वैलेंटाइन के दिन मां बाप और , देश के जवानों को याद करो ।।

 
 
 

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