श्रमदाता को घर पहुंचाओ
- rajaramdsingh
- Mar 22, 2022
- 1 min read
सपने सजाए ,
अरमान जगाये । कुछ कर गुजरने की , दिल में आश लगाये । ।
हर्षोल्लास सेआए थे एक दिन , सपनों के इस श्रेष्ठ शहर में । अधूरे अरमान पूरा करेंगे , देश के इस महानगर में ।।
लेकिन सपनों के सौदागर का, विचार बड़ा है भोला । आंसू बहाते जा रहे , भले ही अंदर शोला ।।
अरे अदृश्य दुनियां के दुश्मन , नरभक्षी काल कोरोना । क्या बिगाड़ा मानव जिससे, उtसके भाग्य में दिया तू रोना ।।
नंगे पांव हीं तपती सड़क पर , खाली पेट यह जा रहा । सिर पर थैला कपड़ा मैला , डंडे पुलिस के खा रहा ।।
कोई पैदल कोई ट्रक में , होकर कोई बस में सवार । कोई ऑटो मोटर सायकल , तो कोई चला बंद कर व्यापार ।।
हे दीनबंधु हे दया निधान , इन बेसहारों की जान बचाओ । लेकर अपनी जिम्मेदारी ,
श्रमदाता को घर पहुंचाओ ।। **********************
Comments