इंसान भी पिघलता है
- rajaramdsingh
- Mar 20, 2022
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Updated: Feb 17, 2023
सच्चाई की राह में , बिछे हो क्यों न शूल । अनबरत वहां चलने से , बन जाते वह फूल ।।
रस्सी घिसती पत्त्थर को , बार बार रगड़ने से । इंसान भी पिघलता है , सच्चाई को समझने से ।।
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