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सफलता के गुड़

  • rajaramdsingh
  • Mar 26, 2022
  • 3 min read

Updated: Mar 28, 2022

१ ) एक नौजवान ने एक वार सुकरात से सफलता का रहस्य पूछा। सुकरात ने उस नौजवान को अगली सुबह नदी के किनारे आने को कहा। अगले दिन जब वह मिले तो तो सुकरात ने उस नौजवान से उसके साथ नदी की तरफ चलने को कहा। बढ़ते बढ़ते जब पानी उसकी गर्दन तक आ पहुंची तो सुकरात ने अचानक उस नौजवान का सिर पकड़ कर पानी में डुबो दिया। नौजवान बाहर निकलने के लिए बहुत छटपटाया परन्तु सुकरात ने उसे तबतक नहीं छोड़ा जब तक कि वह लड़का नीला नहीं पड़ने लगा। सुकरात ने जैसे हीं उसका सिर पानी से ऊपर निकाला तो सबसे पहले उसने एक गहरी सांस ली। सुकरात ने सवाल किया जब तुम्हारा सिर पानी के अंदर था तो तुम्हें सबसे ज्यादा किस चीजों की इच्छा थी ? लडके ने जबाब दिया हवा की। सुकरात बोले यही सफलता का राज है। आप जो कुछ भी पाना चाहते हो उसकी तड़प आपके अंदर होनी चाहिए।


२) कमिटमेंट :- परिस्थितियां अनुकूल कभी नहीं होती। अपने मुकाम पर पहुँचने के लिए किसी भी धारा के साथ न तो हम बाह सकते हैं न हीं किनारे पर खड़े रह सकते है। कभी हमें हवा के रुख के साथ तो कभी उसके बिपरीत चलनी पड़ती है।

जहाज जब गहरे पानी में जाता है तो उसे तूफ़ान का खतरा रहता है परन्तु जब वह किनारे पर हीं खड़ी रहे तो उसमें जंग हीं लग जाएगा । दूरदर्शी लोग न तो तूफ़ान से डर सकते और ना हीं उन्हें जंग हीं छू सकता है।


३) जिम्मेदारी : - जिस प्रकार आदमी डिक्सनरी पर बैठकर अपना स्पेलिंग ठीक नहीं कर सकता , बिना कड़ी मिहनत किये हुए कोई भी व्यक्ति सफलता हासिल नहीं कर सकता।

कुदरत चिड़ियों को खाना तो अवश्य देता है लेकिन उसके घोसले में नहीं। उन्हें खाना पाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। आपको भगवान ने मनुष्य योनि में पैदा किया यही भगवान का इशारा है। सफलता पाने के लिए कड़ी मेहनतऔर जिम्मेदारी से काम करना ज़रूरी है।

४) कॅरक्टर : - वोट से या जनता की राय से नहीं बल्कि एक लीडर के चरित्र से हीं दिशा तय होती है। सफलता की राहों में बहुत हीं रुकावटें पैदा होती हैऔर रूकाबटें को पार करने के लिए एक अच्छे चरित्र की ज़रूरत होती है।


५:- Attitude : - जिस attitude से आप दुनिया को देखोगे दुनिया आपको वैसी हीं दिखेगी।

तीन आदमी ईंटों की जोड़ाई कर रहे थे। उसे देख एक राहगीर ने पूछा - तुम क्या कर रहे हो ?

a ) पहले ने कहा तुम देखते नहीं कि मैं रोजी रोटी में लगा हूँ ।

b ) दूसरे ने कहा तुम देखते नहीं मैं ईंटों कि जोड़ाई कर रहा हूँ।

c ) परन्तु तीसरे ने कहा मैं एक खूबसूरत इमारत बना रहा हूँ।

अंत में मैं कहना चाहूँगा कि

जब हम ज़रूरत से ज्यादा खाते हैं तो अपनी मोटापा खुद चुनते हैं।

जब हम जरुरत से ज्यादा शराब पीते हैं तो अगली सुबह सिरदर्द कि परेशानी भी हम खुद चुनते हैं।

अगर हम शराब पीकर गाडी चलाते हैं तो दुर्घटना भी हम खुद चुनते हैं।

अगर हम घटिया नेता का चुनाव करते हैं तो अपनी बर्बादी भी हम खुद चुनते हैं।

सर्वविदित है कि चुनाव के बाद उसका परिणाम आता है। हम चुनाव के लिए आज़ाद हैं परन्तु एक वार चुन लेने के बाद वही चुनाव हमें कण्ट्रोल करने लग जाता है। चुनाव कि तुलना हम कुम्हार से कर सकते हैं जो अनुकूल मिटटी से मन चाहे आकार का बर्तन बना देता है। ठीक उसी प्रकार अगर हमने चुनाव में अपने अनुकूल उम्मीदवार को चुनकर लाते हैं तो मर्ज़ी के अनुसार स्वतन्त्रता पा सकते हैं।

 
 
 

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