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सबका प्यार नहीं मिलता ।

  • rajaramdsingh
  • Oct 16, 2022
  • 1 min read

एक बंधन में बंधा हो दूजा ,

तीजा बंधन छूट गया ।

रक्षा बंधन मनी तो हमसे ,

करवाचौथ रूठ गया ।।

दिन होली हो रात दिवाली ,

दो त्योहार नहीं मिलता ।

इस धरती पर कभी किसी को ,

सबका प्यार नहीं मिलता ।।


अवधपति दशरथ का आंगन ,

लगता था खाली खाली ।

चार पुत्र खेले तो उसमें ,

हुई अजब सी खुशहाली ।।

जिस सुख ने दामन थामहां था,

पर वो जल्दी छूट गया ।

राम रुके तो धरती पर से ,

दशरथ का नाता छूट गया ।।

देवताओं को भी अपना ,

सपना साकार नहीं मिलता ।

इस धरती पर कभी किसी को ,

सबका प्यार नहीं मिलता ।।


पचपन भील चढ़ी जुबानी ,

और जवानी चौसर थी ।

पांडू पुत्र भटके वन वन में ,

और ठोकर खाई दर दर की ।।

रश्मिरथी को हरा कीर्ति के ,

सीमाओं को पार गया ।

वही पार्थ एक दिन भीलों के ,

हाथों हीं से हार गया ।।

एकबार जो मिल जाता है ,

वो हरवार नहीं मिलता ,

इस धरती पर कभी किसी को ,

सबका प्यार नहीं मिलता ।।

**********************

कुमार विश्वास 16/10/2022

 
 
 

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