समाज का शत्रु*
- rajaramdsingh
- Mar 21, 2022
- 1 min read
निश्छल होता जब आवभाव , अपनों से होता खूब लगाव । वही होता है सच्चा साथी , जिससे हो भावनात्मक लगाव ।।
जो संकट में आपसे कटता , दुश्मनों से जाकर सटता । दोस्त नहीं है जानी दुश्मन , जो स्वार्थवश अपना कहता ।।
जो काम बिगाड़ मज़ाक उड़ाये, अपने मुंह मियां मिट्ठू कहाये । खुश खबर भले हीं ना दे , पर बुरी खबर से अवश्य लजाये ।।
ये होते सिर्फ सुख के साथी , इनकी नहीं होती कोई जाति । इनसे रहना सदा हीं बचके , सांप से भयंकर इनकी प्रजाति ।।
इसीलिए इंसान पहचानो , अपने पराये को जानो । मीठे विष से जो करे आघात , समाज का शत्रु इनको मानो ।। ***********************
Comments