सरस्वती वन्दना
- rajaramdsingh
- Mar 24, 2022
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( शायरी )
माता की दरवार सजी है, भक्तों की है भरमार ,
माँ की शरण में जो भी आता , उसका बेरा पार I
हम भी तेरे दर पे , एक आस लेके आये हैं ,
अज्ञानतम मिटा दे जहां की ,ये फ़रियाद लेके आये हैं II
(वन्दना प्रारम्भ )
हे वीणापाणि हंससवारी ,वीणा बजा के अन्धेरा मिटा दे
वीणा बजा के अन्धेरा मिटा दे , तू सुनले अरजिया हमारी ,
ज्ञान का दीपक,दिल में जगा के,वीणा बजा के अन्धेरा मिटा दे II
अन्धेरा मिटा के जग से , उजाला फैला दे
अपनी शरण में मैया मुझको लगा ले हो . . . .अपनी शरण में मैया
करूँ तेरी पूजा हे वीणापाणि .................. करूँ तेरी पूजा
वीणा बजा के अन्धेरा मिटा दे ................... वीणा बजा के अन्धेरा मिटा दे
हे वीणापाणि हंससवारी ,वीणा बजा के अन्धेरा मिटा दे
माई मेरा जग में नहीं कोई दूजा ,
दिन रात तेरी मैया करता हूँ पूजा .........हो माई मेरा जग में नहीं कोई दूजा ,
हंस पे तू आजा माई ज्योति जगा दे .......हंस पे तू आजा माई ज्योति जगा दे
वीणा बजा के अन्धेरा मिटा दे
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