हम कुशाग्र हैं कुश के बंशज
- rajaramdsingh
- Oct 16, 2022
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Updated: Sep 23, 2023
......*हम कुशाग्र हैँ*
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हम कुशाग्र हैँ कुश के बंशज ,
आर्यावर्त की आन ।
गौतमबुद्ध की कार्यशैली ,
अशोक सम्राट की शान ।।
हम हैं अपने पिता के ज्येष्ठ ,
बनाया विधाता जिसको श्रेष्ठ ।
स्वार्थवश जिसे कुछ स्वार्थी,
बतला रहे कनिष्ठ को ज्येष्ठ ।।
सुप्रीमकोर्ट जब जोर जोर से ,
हरिबंश क़ी रट लगाई थी ।
दियाकुमारी सीना तानकर ,
बन्शावली दिखलाई थी ।।
श्रीराम ने कुशाग्र कुश की
कुशावती राजधानी बनवाई ।
एक ना चली गद्दारों की ,
सबकी बोलती बंद करवाई।।
बनाई राजधानी लाहौर जिनकी ,
लौटकर लल्लू घर को आये ।
फिर दे करके भारत में शरण ,
कुशवंशी सहोदर का फर्ज़ निभाये ।।
चलो लहराए कीर्ति पताखा ,
अगली पीढ़ी तैयार करें ।
चमके कुश का कीर्ति पताखा ,
मिलजुल करके विचार करें ।।
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राजाराम सिंह 15 अक्टूबर 2022
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