हिन्दी है अतुलनीय
- rajaramdsingh
- Mar 22, 2022
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Updated: Dec 6, 2023
हिन्दी महान या इंग्लिश , शब्दों को पढकर जानिए । देवनागरी लिपि विशिष्ठ, हृदय से इसको मानिये ।।
छूने को चरण कहते , खाने को कहते टंगड़ी । अड़ा दे तो कहे टांग , खेलने को कहे लंगडी ।।
धस जाये तो पैर कहे , प्रभू के हों तो पाद । आगे बढाने को कदम , बाप की हो तो लात ।।
गदहे की कहते दुलत्ती, राह चिन्ह को पद । प्रभू के हों तो पाद कहे, घुंघरू बांधे तो पग ।।
सभी समानार्थक शब्द , जता रहे हिन्दी का बेग । अंग्रेजी में इसके लिये , शब्द मात्र है लेग ।।
अंग्रेजों की भाषा अंग्रेजी, हिंदी हमारी अभिलाषा । सुशोभित कर अलंकार , देती पृथक परिभाषा ।।
अतुलनीय हिंदी करती
सपनों की परिकल्पना । संस्कार क़ा भी द्योतक , हिंदी बिंदी अभिव्यंजना ।।
हिंदी को समुद्र समझें , संस्कृत मां समान ।
जिसके ग्रंथ दे रहे,
जग को अदभुद ज्ञान ।।
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राजाराम रघुवंशी
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